डेस्क का नक्शा: स्क्रीन, कुर्सी और रोशनी
मेज़ की थोड़ी-सी व्यवस्था बदलने से आँखों और गर्दन, दोनों को आराम मिल सकता है। नीचे का चित्र किसी आम घर या दफ़्तर की मेज़ का साइड-व्यू है।
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१
स्क्रीन की दूरी। लगभग एक हाथ दूर रखें। अक्षर छोटे लगें तो स्क्रीन पास खींचने के बजाय फ़ॉन्ट बड़ा करें।
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२
ऊँचाई। स्क्रीन का ऊपरी किनारा आँखों के बराबर या थोड़ा नीचे। लैपटॉप हो तो किताबों का ढेर या स्टैंड काम आता है।
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३
खिड़की की दिशा। खिड़की बगल में हो तो अच्छा; ठीक पीछे होने पर स्क्रीन पर चमक, ठीक सामने होने पर आँखों में चौंध।
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४
कमरे की रोशनी। स्क्रीन की चमक कमरे की रोशनी जैसी रखें। अंधेरे कमरे में चमकीली स्क्रीन आँखों को ज़्यादा थकाती है।
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५
हवा। पंखे, कूलर या AC की हवा सीधे चेहरे पर न आए; इससे आँखें जल्दी सूखी लग सकती हैं।
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६
फ़ोन। फ़ोन भी आँखों से थोड़ा दूर पकड़ें और लंबी पढ़ाई के लिए बड़ी स्क्रीन चुनें।
दीया जलने के बाद की आदतें
दिन भर की थकान अक्सर शाम को महसूस होती है। ऐसे में अंधेरे में फ़ोन की चमक आँखों को और भारी लगा सकती है।
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अंधेरे में स्क्रीन नहीं। फ़ोन या टीवी देखें तो कमरे में हल्की रोशनी ज़रूर रखें।
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चमक कम करें। शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस घटाएँ और गर्म रंग वाली सेटिंग आज़माएँ।
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लेटकर पास से नहीं। बिस्तर पर लेटकर फ़ोन को आँखों के बहुत पास रखकर पढ़ने से बचें।
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सोने से पहले दूरी। सोने से कुछ देर पहले फ़ोन रख दें; किताब, बातचीत या संगीत बेहतर साथी हैं।
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पूरी नींद। अच्छी नींद पूरे शरीर के आराम का हिस्सा है, और आँखें भी उसी शरीर का हिस्सा हैं।
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सुबह भी किरकिरी? अगर उठने पर रोज़ आँखें चिपकी, लाल या दर्द भरी हों, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
मंडी की पर्ची: थाली में रंग
कोई एक सब्ज़ी या फल नज़र नहीं सुधारता। पर रंग-बिरंगी, मौसमी और विविध थाली शरीर के सामान्य कामकाज के लिए ज़रूरी पोषक तत्व देती है, और आँखें भी उसी शरीर का हिस्सा हैं।
- गाजर, शकरकंद, कद्दू नारंगी रंग की सब्ज़ियाँ, जिनसे शरीर विटामिन A बनाता है; विटामिन A सामान्य दृष्टि के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों में से एक है।
- पालक, मेथी, सरसों, बथुआ हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, मौसम के हिसाब से; रोज़ की दाल-सब्ज़ी में आसानी से जुड़ जाती हैं।
- पपीता, आम, संतरा मौसमी फल, नाश्ते या शाम के छोटे भोजन में।
- आँवला, अमरूद, नींबू विटामिन C वाले, जो विविध भोजन का अच्छा हिस्सा हैं।
- मूंगफली, अलसी, अखरोट थोड़ी मात्रा में, अच्छे वसा के लिए।
- दाल, अंडा, मछली जो जिसे खाता हो; प्रोटीन वाली चीज़ें थाली को पूरा करती हैं।
- पानी गर्मी और AC वाले कमरों में दिन भर थोड़ा-थोड़ा।
विटामिन या सप्लीमेंट की गोलियाँ अपने मन से न लें; ज़रूरत लगे तो डॉक्टर से पूछें। डायबिटीज़ हो तो खान-पान अपने डॉक्टर की सलाह से तय करें।
नेत्र-विशेषज्ञ से कब मिलें
अभ्यास और आदतें आराम के लिए हैं, जाँच के लिए नहीं। नीचे के संकेत सामान्य जानकारी हैं; ये किसी बीमारी का निदान नहीं करते, बस बताते हैं कि कब देर नहीं करनी चाहिए।
देर न करें
- एक या दोनों आँखों की नज़र अचानक चली जाए या बहुत धुंधली हो जाए
- आँख में चोट लगे या कोई केमिकल चला जाए
- आँख में तेज़ दर्द, लाली, और साथ में सिरदर्द या उल्टी
- अचानक बहुत-सी चमक, तैरते धब्बे या आँख के आगे परदा-सा
कुछ दिनों में
- लाली, किरकिरी या पानी आना जो कुछ दिनों में ठीक न हो
- पढ़ते या स्क्रीन देखते समय बार-बार सिरदर्द
- पास या दूर पढ़ने में धीरे-धीरे बढ़ती दिक्कत
- बच्चा बहुत पास से पढ़े, टीवी के पास जाकर बैठे या आँखें मिचकाए
बिना लक्षण के भी
- चालीस की उम्र के आसपास और उसके बाद
- डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर होने पर
- चश्मा या लेंस पहनते हैं, तो डॉक्टर के बताए अंतराल पर
- बच्चों की पढ़ाई शुरू होने के आसपास
आँख में गंभीर चोट या अचानक नज़र जाने जैसी आपात स्थिति में भारत का आपातकालीन नंबर 112 डायल करें या सीधे नज़दीकी अस्पताल जाएँ।