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Mewaral छोटे-छोटे अभ्यासों से बुना आँखों का आरामदेह दिन
रोज़ के अभ्यास

छह अभ्यास, बिना ज़ोर और बिना जल्दबाज़ी

हर अभ्यास एक छोटा अध्याय है: कैसे करें, यह क्या नहीं करता और कब रुक जाना चाहिए। इन्हें आराम की आदत की तरह लें, किसी इलाज की तरह नहीं।

सामान्य शैक्षिक जानकारी। आँखों से जुड़ी किसी परेशानी के लिए नेत्र-विशेषज्ञ से मिलें।

छह अध्याय

शुरुआत में कोई भी एक-दो अभ्यास चुनें। सब कुछ एक साथ करने की ज़रूरत नहीं।

हथेलियों की गर्म छाँव (पामिंग)

यह अभ्यास आँखों को कुछ पल अंधेरा और गर्माहट देता है। बहुत लोगों को इससे स्क्रीन के बाद हल्कापन महसूस होता है।

  1. आराम से बैठें, कोहनियाँ मेज़ या घुटनों पर टिकाएँ।
  2. हथेलियाँ आपस में रगड़कर हल्का गर्म करें।
  3. आँखें बंद करें और हथेलियों को कटोरी जैसा मोड़कर आँखों के ऊपर रखें; उँगलियाँ माथे पर।
  4. आँखों की पुतलियों पर कोई दबाव नहीं, बस हल्की छाँव।
  5. धीरे साँस लें, फिर हथेलियाँ हटाकर धीरे से आँखें खोलें।

यह क्या नहीं करतानज़र का नंबर नहीं बदलता और किसी नेत्र रोग का इलाज नहीं है।

कब रुकेंआँख में दर्द, जलन बढ़े, या आँख की हाल में सर्जरी हुई हो तो न करें।

Smiling woman covering her eyes with one hand, taking a calm pause from looking

पलकों का विराम

स्क्रीन या किताब पर ध्यान लगाते समय हम अनजाने में पलकें कम झपकाते हैं। इसी से कई लोगों को आँखें सूखी या भारी लगती हैं।

  1. स्क्रीन से नज़र हटाएँ।
  2. कुछ बार धीरे-धीरे और पूरी तरह पलकें बंद करें, फिर खोलें, जैसे आँखों पर हल्का परदा गिर रहा हो।
  3. एक बार दो-तीन सेकंड के लिए आँखें बंद रखें और चेहरा ढीला छोड़ दें।
  4. दिन में जब भी याद आए, दोहराएँ; कोई गिनती ज़रूरी नहीं।

यह क्या नहीं करतालगातार रहने वाली ड्राई आई की समस्या का इलाज नहीं है।

कब रुकेंकिरकिरी, लाली या पानी आना कुछ दिनों में न जाए तो डॉक्टर को दिखाएँ।

20-20-20 की आदत

यह सबसे आसान याद रखने वाला नियम है: लगभग हर 20 मिनट पर, करीब 20 फ़ुट (लगभग 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को करीब 20 सेकंड देखें। अंक याद रखने का सहारा भर हैं, कोई कड़ा नियम नहीं।

  1. फ़ोन या कंप्यूटर पर एक हल्का रिमाइंडर रखें, या विराम को किसी पुरानी आदत से जोड़ें।
  2. नज़र उठाकर खिड़की के बाहर या कमरे के सबसे दूर वाले कोने को देखें।
  3. पलकें झपकाते रहें, कंधे ढीले छोड़ें।
  4. बीस सेकंड बाद धीरे से काम पर लौटें।

यह क्या नहीं करतामायोपिया या पास की नज़र को ठीक नहीं करता; केवल आराम का एक विराम है।

कब रुकेंदूर देखने पर बार-बार धुंधला दिखे तो नज़र की जाँच करवाएँ।

पास और दूर का खेल

इसमें नज़र बारी-बारी से पास और दूर की चीज़ पर जाती है। यह लंबे समय तक एक ही दूरी पर टिके रहने से एक छोटा बदलाव है।

  1. एक हाथ आगे बढ़ाकर अंगूठा ऊपर करें।
  2. कुछ पल अंगूठे के नाखून को आराम से देखें।
  3. फिर अंगूठे के पीछे, दूर की किसी चीज़ पर नज़र ले जाएँ।
  4. बिना जल्दी के कुछ बार दोनों के बीच आएँ-जाएँ, फिर आँखें बंद करके आराम दें।

यह क्या नहीं करतापढ़ने का चश्मा या दूर का चश्मा हटाने का तरीका नहीं।

कब रुकेंचक्कर आएँ, सिरदर्द हो या दो-दो चीज़ें दिखें, तो रुकें और डॉक्टर से पूछें।

नज़र की धीमी सैर

सिर स्थिर रखते हुए आँखों को धीरे-धीरे अलग-अलग दिशाओं में ले जाना। यह किसी जिम की कसरत नहीं, बल्कि एक हल्की खिंचाव-भरी सैर है।

  1. सीधे बैठें, गर्दन ढीली रखें।
  2. आँखें धीरे से ऊपर ले जाएँ, फिर नीचे।
  3. फिर बाईं ओर, फिर दाईं ओर; हर बार बीच में लौटकर एक पल रुकें।
  4. जहाँ तक आराम से जाएँ, वहीं तक; आँखें ज़बरदस्ती किनारे तक न खींचें।

यह क्या नहीं करताभेंगेपन, आँख की मांसपेशियों की बीमारी या नंबर का इलाज नहीं है।

कब रुकेंग्लूकोमा, रेटिना की समस्या या हाल की सर्जरी हो, तो पहले डॉक्टर से पूछें।

दिन की रोशनी में कुछ पल

बाहर खुली जगह में नज़र अपने आप दूर-दूर तक जाती है। आँगन, छत, पार्क या स्कूल का मैदान, कहीं भी कुछ समय बिताना दिनचर्या का अच्छा हिस्सा हो सकता है, खासकर बच्चों के लिए।

  1. दिन में कुछ बार बाहर निकलें, भले थोड़ी देर के लिए।
  2. पेड़, दूर की इमारतें, बादल या पहाड़ियाँ देखें।
  3. तेज़ धूप में टोपी या धूप का चश्मा काम आता है।
  4. सूरज की ओर सीधे कभी न देखें, न सुबह, न शाम।

यह क्या नहीं करतासूरज देखने वाला कोई अभ्यास नहीं; ऐसी सलाह आँखों को नुकसान पहुँचा सकती है।

कब रुकेंधूप में आँखें बहुत चुभें या पानी आए, तो छाँव में जाएँ।

सावधानी की पट्टिका

ये अभ्यास हल्के हैं, फिर भी हर आँख की कहानी अलग होती है। नीचे दी गई स्थितियों में शुरू करने से पहले नेत्र-चिकित्सक से बात कर लें।

पहले डॉक्टर से पूछें, अगर

  • हाल में आँख की कोई सर्जरी हुई है, जैसे मोतियाबिंद या लेसिक
  • ग्लूकोमा, रेटिना या किसी और नेत्र रोग का इलाज चल रहा है
  • डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या कोई लंबी बीमारी है
  • गर्भावस्था में नज़र में कोई बदलाव महसूस हो रहा है
  • आप ऐसी दवाएँ ले रहे हैं जिनसे नज़र पर असर पड़ सकता है
  • बच्चों के लिए: अभ्यास बड़ों की देखरेख में, खेल की तरह

तुरंत रुक जाएँ, अगर

  • आँख में दर्द, चुभन या जलन बढ़ने लगे
  • चक्कर, मितली या सिरदर्द हो
  • चीज़ें दो-दो दिखने लगें
  • लाली, सूजन या पानी आना बढ़ जाए
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहने हों और आँख रगड़ने का मन हो: पहले लेंस उतारें, हाथ धोएँ
अपनी चाबी चुनें

चार लोगों की चार दिनचर्याएँ

घर की खूँटी पर टँगी चाबियों की तरह, हर व्यक्ति के लिए अलग छोटी दिनचर्या। ये उदाहरण हैं; अपनी सुविधा से बदलें।

विद्यार्थी

  1. ऑनलाइन क्लास के हर विषय के बीच 20-20-20
  2. कोचिंग से लौटकर एक बार हथेलियों की छाँव
  3. शाम को कुछ देर मैदान या छत पर

दफ़्तर में काम करने वाले

  1. हर मीटिंग के बाद पलकों का विराम
  2. लंच के बाद पास-दूर का खेल
  3. घर लौटते समय फ़ोन जेब में, नज़र खिड़की से बाहर

बड़े-बुज़ुर्ग पाठक

  1. अखबार अच्छी रोशनी में, अपने चश्मे के साथ
  2. हर कुछ पन्नों के बाद आँखें बंद करके आराम
  3. सुबह की सैर में दूर के पेड़ों पर नज़र

घर सँभालने वाले

  1. सिलाई-कढ़ाई या मोबाइल पर रेसिपी के बीच दूर देखना
  2. दोपहर के आराम में एक-दो मिनट पामिंग
  3. शाम होते ही रसोई और कमरे की बत्ती जलाना
टूटी टाइलें

आम गलतियाँ और उनके नरम विकल्प

अच्छी नीयत से की गई कुछ आदतें आँखों को आराम के बजाय तकलीफ़ दे सकती हैं।

गलती

थकान होने पर आँखें ज़ोर से रगड़ना

नरम विकल्प

आँखें बंद करें, धीरे पलकें झपकाएँ; हाथ लगाना ही हो तो साफ़ हाथों से हल्के से।

गलती

पामिंग में हथेलियों से आँखें दबाना

नरम विकल्प

हथेलियाँ कटोरी जैसी रखें, ताकि पुतलियों पर ज़रा भी दबाव न पड़े।

गलती

"आँखों के लिए अच्छा है" सोचकर सूरज की ओर देखना

नरम विकल्प

सूरज की ओर कभी नहीं; दूर के पेड़, बादल या आसमान का खुला हिस्सा देखें।

गलती

अभ्यास के भरोसे डॉक्टर का बताया चश्मा छोड़ देना

नरम विकल्प

चश्मा या लेंस वैसे ही पहनें जैसे बताया गया है; अभ्यास उसके साथ, उसकी जगह नहीं।

गलती

रविवार को एक लंबा "आँखों का सत्र", बाकी हफ़्ते कुछ नहीं

नरम विकल्प

हर दिन कुछ छोटे विराम, बिखरे हुए; टाइलें रोज़ बिछती हैं।

गलती

दर्द या धुंधलापन होने पर भी "और अभ्यास" करना

नरम विकल्प

रुकें। ऐसे लक्षण आराम के नहीं, जाँच के संकेत हैं।

सवाल-जवाब

जो सवाल सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं

क्या ये अभ्यास चश्मे, दवा या इलाज की जगह ले सकते हैं?

नहीं। ये आराम की आदतें हैं। डॉक्टर ने जो चश्मा, लेंस, आई-ड्रॉप या इलाज बताया है, उसे जारी रखें। कोई बदलाव करना हो तो पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

क्या इनसे नज़र का नंबर कम हो सकता है?

इस बात का कोई भरोसेमंद आधार नहीं है कि ऐसे अभ्यास नंबर बदलते हैं। ये लंबी पढ़ाई या स्क्रीन के बीच आँखों को आरामदेह महसूस कराने में मदद कर सकते हैं; बस इतना ही।

अभ्यास के दौरान असहज महसूस हो तो क्या करें?

तुरंत रुकें। आँखें बंद करके कुछ देर आराम करें। अगर दर्द, चक्कर, दोहरा दिखना या लाली बनी रहे, तो नेत्र-चिकित्सक को दिखाएँ।

नेत्र-विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?

नज़र अचानक कम हो, आँख में दर्द या चोट हो, अचानक चमक या तैरते धब्बे दिखें, लाली कुछ दिनों में न जाए, या पढ़ने-देखने में बढ़ती दिक्कत हो। अचानक और गंभीर स्थिति में 112 पर कॉल करें। पूरी सूची आँखों का माहौल पन्ने पर है।

दिन में कितनी बार करें?

कोई तय गिनती नहीं है। रोज़ के कुछ छोटे विराम, जब भी याद आए, काफ़ी हैं। ज़्यादा करने से ज़्यादा फ़ायदा होगा, ऐसा मानकर ज़ोर न लगाएँ।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर ये अभ्यास कर सकते हैं?

पलकों का विराम और दूर देखना आम तौर पर लेंस के साथ भी आराम से हो जाते हैं। आँखें न रगड़ें और लेंस की देखभाल वैसे ही करें जैसा आपके डॉक्टर या ऑप्टोमेट्रिस्ट ने बताया है।

क्या बच्चे भी ये अभ्यास कर सकते हैं?

हाँ, खेल की तरह और बड़ों की देखरेख में। बच्चों के लिए बाहर खेलने का समय और स्क्रीन से बीच-बीच में ब्रेक खास तौर पर काम की आदतें हैं। बच्चा बहुत पास से टीवी देखे या बार-बार आँखें मिचकाए, तो जाँच करवाएँ।

दीये की लौ पर देर तक टकटकी लगाने वाले अभ्यास के बारे में क्या?

बिना पलक झपकाए देर तक किसी चीज़ को घूरना कई लोगों में आँखें सुखा सकता है। अगर आप ऐसी कोई पारंपरिक साधना करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछें और असहजता होते ही रुकें। Mewaral इसे रोज़ के अभ्यास के रूप में नहीं सुझाती।

क्या ब्लू-लाइट वाले चश्मे ज़रूरी हैं?

इस पर राय अलग-अलग है और शोध अभी जारी है। स्क्रीन की चमक कमरे के हिसाब से रखना, विराम लेना और रात को स्क्रीन कम करना जैसी आदतें हर किसी के लिए आसान शुरुआत हैं। चश्मे का फ़ैसला अपने ऑप्टोमेट्रिस्ट के साथ लें।